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Friday, July 30, 2010

ek bhyanak raat

एक भयानक रात -
माँ के जोर जोर से चिल्लाने कि आवाज से रात एक बजे मेरी नींद टूटी |
माँ - इतना महंगा किराये पर घर लिया है और ये हाल है
मैंने आधी नींद मे देखा कि माँ चिल्लाते हुए मुझे उठने को कह रही है | उसके घुटनों तक पानी है और एक हाथ मे पानी की बाल्टी है , मेरी समझ मे नहीं आया कि क्या हो रहा है ? मैंने सोचा कि मै सपना देख रहा  हूँ , लेकिन माँ के लगातार चिल्लाने से मुझे हकीकत का एहसास  हुआ | मै हतप्रद हो गया जब मैंने देखा कि सारे घर मे पानी ही पानी भरा हुआ है , आधी बेड तक पानी भरने से सारे किताबे , जूते , चप्पल , तैर  तैर कर मुझे चिड़ा रहें थे | थोड़ी देर तक मेरी समझ मे नहीं आया  कि मै क्या करू ? फिर अचानक मैंने सामानों  को फटाफट उठाना शरू किया | अब  मै समझा कि कल सुबह से जो बारिश हो रही थी ये सब उसका कमाल है | अभी रात  के तीन बज रहें  है और मै टेबल के उपर अपना लैपटॉप रख कर ये कहानी लिख रहा हूँ | शुक्र है कि लाइट है |
आज मुझे एहसास हो रहा है कि लोग बाढ़ आने पर कैसे  रहते होंगे | अभी भी बाहर  लगातार बारिश हो रही है | भगवान  बाढ़ से सबको बचाए |
गुड मोर्निंग |

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