जागते रहो
नहीं तो जिंदगी दस के नोट की तरह खर्च हो जायेगी,
जागते रहो
नहीं तो दिन के अधूरे सपने रात को सोने नहीं देंगे,
जागते रहो
आखिर जागोगे नहीं तो जियोगे कैसे ?
दिन में एक बार आँखे बंद कर अपने अंदर झांको
जिंदगी का सार मिल जायेगा
तन, मन, मेधा
सबका जागरण हो जायेगा,
सौजन्य से : दैनिक जागरण
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